सरकार ने बांटे 28748 करोड़ रुपये, PLI योजनाओं के तहत इन क्षेत्र की कंपनियों को दिया गया पैसा; सामने आई जानकारी
PIL Scheme Update
नई दिल्ली: PIL Scheme Update: भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में मोदी सरकार की Production-Linked Incentive (PLI) योजना ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक सरकार ने 14 प्रमुख क्षेत्रों के लिए 28,748 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित कर दी है.
आयात पर लगाम, निर्यात में उछाल
इस योजना का सबसे क्रांतिकारी असर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर, विशेषकर मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग पर दिखा है. मंत्रालय के मुताबिक, साल 2020-21 की तुलना में भारत में मोबाइल फोन के आयात में 77% की भारी कमी आई है. आज स्थिति यह है कि भारत की कुल मोबाइल मांग का 99% हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा हो रहा है. भारत अब केवल फोन असेंबल नहीं कर रहा, बल्कि बैटरी, कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले जैसे जटिल पुर्जे भी देश में ही बना रहा है.
रोजगार और निवेश के खुले द्वार
PLI योजना ने न केवल अर्थव्यवस्था को रफ्तार दी है, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियां भी पैदा की हैं. आंकड़ों के अनुसार:
- रोजगार: अब तक 14.39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है.
- निवेश: 14 क्षेत्रों में कुल 836 आवेदनों को मंजूरी मिली है, जिससे ₹2.16 लाख करोड़ से अधिक का वास्तविक निवेश जमीन पर उतरा है.
- बिक्री और निर्यात: इन सेक्टर्स ने ₹20.41 लाख करोड़ की संचयी बिक्री और ₹8.3 लाख करोड़ का शानदार निर्यात दर्ज किया है.
फार्मा और ऑटो सेक्टर में आत्मनिर्भरता
दवाओं के मामले में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने बल्क ड्रग्स पर जोर दिया था. सुखद परिणाम यह है कि भारत में पहली बार 191 बल्क ड्रग्स का निर्माण शुरू हो चुका है, जिससे ₹1,785 करोड़ के आयात की बचत हुई है.
वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी तेजी देखी गई है. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और एडवांस सेफ्टी सिस्टम के क्षेत्र में हो रहे निवेश की बदौलत 2025-26 में ₹32,879 करोड़ की बिक्री दर्ज की गई है. टेलीकॉम सेक्टर में भी निर्यात का आंकड़ा ₹21,033 करोड़ तक पहुंच गया है.
भविष्य की तैयारी: सोलर और व्हाइट गुड्स
सरकार अब ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है. सोलर मॉड्यूल के लिए PLI योजना के तहत 48 GW क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है, जिसमें ₹52,942 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है. इसी तरह, AC और LED जैसे 'व्हाइट गुड्स' में घरेलू वैल्यू एडिशन को 2028-29 तक बढ़ाकर 80% करने का लक्ष्य रखा गया है.
₹1.97 लाख करोड़ के कुल परिव्यय के साथ शुरू हुई यह योजना अब भारतीय विनिर्माण की रीढ़ बन चुकी है. यह न केवल "लोकल फॉर वोकल" को बढ़ावा दे रही है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को भी मजबूती से स्थापित कर रही है.